हनुमान जी की पूजा घर पर कैसे करें?

हनुमान पूजा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह आस्था, अनुशासन और मानसिक शक्ति को विकसित करने की एक गहरी साधना है। भारत में करोड़ों श्रद्धालु हर मंगलवार और शनिवार को बजरंगबली की पूजा करते हैं। उत्तर भारत के प्रमुख मंदिरों—जैसे वाराणसी, अयोध्या, दिल्ली और उज्जैन—में इन दिनों विशेष भीड़ देखी जाती है। कई समाचार रिपोर्टों (जैसे दैनिक जागरण, हिंदुस्तान टाइम्स) में यह उल्लेख किया गया है कि संकट के समय लोगों का झुकाव विशेष रूप से हनुमान उपासना की ओर बढ़ जाता है।

धार्मिक ग्रंथों जैसे रामचरितमानस (गोस्वामी तुलसीदास) और वाल्मीकि रामायण में हनुमान जी को भक्ति, बल, बुद्धि और निष्ठा का प्रतीक बताया गया है। “संकटमोचन” नाम केवल उपाधि नहीं, बल्कि उनके चरित्र का सार है।

वास्तविक जीवन में, जब व्यक्ति मानसिक तनाव, भय, आर्थिक संकट या पारिवारिक उलझनों से गुजरता है, तब हनुमान पूजा उसे स्थिरता और आत्मविश्वास देती है।

हनुमान पूजा विधि

Table of Contents

हनुमान पूजा की तैयारी कैसे करें?

हनुमान पूजा की शुरुआत बाहरी सफाई से नहीं, बल्कि आंतरिक तैयारी से होती है। बहुत लोग केवल सामग्री इकट्ठा कर लेते हैं, लेकिन मन को शांत करना भूल जाते हैं।

1️⃣ शारीरिक शुद्धि

  • प्रातः स्नान करें

  • साफ, अधिमानतः हल्के या लाल वस्त्र पहनें

  • शरीर पर सुगंधित चंदन या इत्र लगा सकते हैं

2️⃣ मानसिक तैयारी

  • 2–3 मिनट शांत बैठें

  • गहरी सांस लें

  • मन में “राम” नाम का स्मरण करें

3️⃣ पूजा स्थान की व्यवस्था

  • स्थान को साफ पानी से पोंछें

  • लकड़ी का पट्टा या चौकी रखें

  • लाल कपड़ा बिछाएँ

  • हनुमान जी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें

व्यावहारिक सुझाव:
यदि घर छोटा है, तो भी एक कोना स्थायी पूजा स्थान बना लें। नियमितता अधिक महत्वपूर्ण है, भव्यता नहीं।

हनुमान पूजा की पूजन सामग्री – विस्तृत सूची

सामग्रीमहत्वव्यावहारिक टिप्पणी
सिंदूरशक्ति और ऊर्जाचोला चढ़ाने में उपयोग
चमेली का तेलपरंपरागत प्रियशनिवार को विशेष
लाल फूलभक्ति का प्रतीकताजे हों
गुड़-चनासरल नैवेद्यशुद्ध देसी गुड़ लें
दीपकप्रकाश और ज्ञानघी या सरसों तेल
कपूरवातावरण शुद्धिअंत में आरती

हनुमान पूजा विधि – क्रमबद्ध विस्तृत प्रक्रिया

1️⃣ संकल्प

हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लें।
आंखें बंद करें।

मन में स्पष्ट रूप से अपनी कामना बोलें। संकल्प जितना स्पष्ट होगा, ध्यान उतना गहरा होगा।

उदाहरण:
“मैं अपने परिवार की सुख-शांति, स्वास्थ्य और संकट निवारण हेतु हनुमान पूजा कर रहा/रही हूँ।”

2️⃣ दीप प्रज्वलन

दीपक जलाते समय मन में यह भावना रखें कि अज्ञान का अंधकार दूर हो रहा है।

दीप पूर्व दिशा में रखना शुभ माना जाता है।

3️⃣ आवाहन मंत्र

कम से कम 11 या 21 बार जपें:

ॐ हनुमते नमः

जप करते समय जल्दी न करें। हर शब्द स्पष्ट बोलें।

4️⃣ अभिषेक (ऐच्छिक)

यदि संभव हो तो गंगाजल से हल्का अभिषेक करें।
घर में अधिक विस्तृत विधि आवश्यक नहीं।

5️⃣ सिंदूर और तेल अर्पण

लोककथा के अनुसार, हनुमान जी ने श्रीराम की दीर्घायु के लिए स्वयं को सिंदूर से आच्छादित किया था। इसलिए सिंदूर अर्पण को अत्यंत शुभ माना जाता है।

6️⃣ पुष्प और नैवेद्य

  • लाल फूल अर्पित करें

  • गुड़-चना या बूंदी लड्डू का भोग लगाएँ

  • कुछ मिनट ध्यान करें

हनुमान चालीसा का पाठ – कितनी बार और क्यों?

हनुमान पूजा में हनुमान चालीसा का पाठ केंद्रीय स्थान रखता है। यह 40 चौपाइयों का स्तोत्र है।

पाठ संख्या मार्गदर्शन

परिस्थितिकितनी बार
दैनिक पूजा1 बार
विशेष इच्छा3 बार
बड़ा संकट7 या 11 बार

नियमित पाठ मानसिक शक्ति बढ़ाता है।

सुंदरकांड पाठ कब करें?

यदि जीवन में बड़ा संकट हो, तो सुंदरकांड का पाठ विशेष फलदायक माना जाता है।
कई मंदिरों में मंगलवार को सामूहिक सुंदरकांड होता है।

बजरंग बाण और हनुमान अष्टक

इनका पाठ विशेष परिस्थितियों में किया जाता है।
परंपरा मानती है कि बजरंग बाण अत्यंत प्रभावशाली स्तुति है, इसलिए इसे संयम और श्रद्धा से पढ़ना चाहिए।

हनुमान जयंती पर विशेष हनुमान पूजा

हनुमान जयंती उत्तर भारत में चैत्र पूर्णिमा को मनाई जाती है।

इस दिन:

  • विशेष चोला चढ़ाया जाता है

  • 108 दीपक जलाए जाते हैं

  • भंडारा होता है

मंगलवार और शनिवार का महत्व

मंगलवार

  • ऊर्जा और साहस का प्रतीक

  • मंगल ग्रह से संबंध

शनिवार

  • शनि दोष शांति हेतु

  • लोकमान्यता: हनुमान पूजा से शनि कष्ट कम होते हैं

हनुमान पूजा के मनोवैज्ञानिक लाभ

आधुनिक शोध बताते हैं कि नियमित मंत्र जप से:

  • तनाव कम होता है

  • एकाग्रता बढ़ती है

  • आत्मविश्वास मजबूत होता है

वास्तविक अनुभव में भी, जो लोग रोज़ 10 मिनट जप करते हैं, वे अधिक शांत दिखाई देते हैं।

सामान्य गलतियाँ जिनसे बचना चाहिए

  • जल्दीबाजी में पाठ करना

  • मोबाइल देखते हुए मंत्र पढ़ना

  • तामसिक भोजन

  • क्रोध

भक्ति में एकाग्रता सबसे बड़ा नियम है।

हनुमान पूजा विधि – संक्षिप्त चरण सारांश

चरणक्या करें
तैयारीस्नान, स्थान शुद्धि
संकल्पस्पष्ट कामना
दीपघी/तेल
मंत्रॐ हनुमते नमः
पाठहनुमान चालीसा
समापनक्षमा प्रार्थना

क्षमा प्रार्थना

“हे बजरंगबली, पूजा में हुई त्रुटियों को क्षमा करें और जीवन में सद्बुद्धि दें।”

चौपाई

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर । जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ॥ 1॥

रामदूत अतुलित बल धामा । अंजनिपुत्र पवनसुत नामा ॥ 2 ॥

महाबीर बिक्रम बजरंगी ।कुमति निवार सुमति के संगी ॥ 3 ॥

कंचन बरन बिराज सुबेसा ।कानन कुंडल कुंचित केसा ॥ 4॥ 

हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै ।काँधे मूँज जनेऊ साजै ॥ 5॥

संकर सुवन केसरीनंदन । तेज प्रताप महा जग बंदन ॥ 6॥

बिद्यावान गुनी अति चातुर । राम काज करिबे को आतुर ॥ 7॥

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया । राम लखन सीता मन बसिया ॥ 8॥

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा । बिकट रूप धरि लंक जरावा ॥ 9॥

भीम रूप धरि असुर सँहारे । रामचन्द्र के काज सँवारे ॥ 10 ॥

लाय सजीवन लखन जियाये । श्री रघुबीर हरषि उर लाये ॥ 11 ॥

रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई । तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई ॥ 12 ॥

सहस बदन तुम्हरो जस गावैं । अस कहि श्रीपति कण्ठ लगावैं ॥ 13 ॥

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा । नारद सारद सहित अहीसा ॥ 14 ॥

जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते । कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते ॥ 15 ॥

तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा । राम मिलाय राज पद दीन्हा ॥ 16 ॥

तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना । लंकेस्वर भए सब जग जाना ॥ 17 ॥ 

जुग सहस्र जोजन पर भानू । लील्यो ताहि मधुर फल जानू ॥ 18 ॥

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं । जलधि लाँघि गए अचरज नाहीं ॥ 19 ॥

दुर्गम काज जगत के जेते । सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते ॥ 20 ॥

राम दुआरे तुम रखवारे । होत न आज्ञा बिनु पैसारे ॥ 21 ॥

सब सुख लहै तुम्हारी सरना । तुम रक्षक काहू को डर ना ॥ 22 ॥

आपन तेज सम्हारो आपै । तीनों लोक हाँक तें कॉपै ॥ 23 ॥

भूत पिसाच निकट नहिं आवै । महाबीर जब नाम सुनावै ॥ 24 ॥

नासै रोग हरै सब पीरा । जपत निरंतर हनुमत बीरा ॥ 25 ॥

संकट तें हनुमान छुडावै । मन क्रम बचन ध्यान जो लावै ॥ 26 ॥

सब पर राम तपस्वी राजा । तिन के काज सकल तुम साजा ॥ 27 ॥

और मनोरथ जो कोई लावै । सोई अमित जीवन फल पावै ॥ 28 ॥

चारों जुग परताप तुम्हारा । है परसिद्ध जगत उजियारा ॥ 29 ॥

साधु सन्त के तुम रखवारे । असुर निकन्दन राम दुलारे ॥ 30॥

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता । अस बर दीन जानकी माता ॥ 31 ॥

राम रसायन तुम्हरे पासा । सदा रहो रघुपति के दासा ॥ 32 ॥

तुम्हरे भजन राम को पावै । जनम जनम के दुख बिसरावै ॥ 33 ॥

अंत काल रघुबर पुर जाई । जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई ॥ 34 ॥

और देवता चित्त न धरई । हनुमत सेई सर्ब सुख करई ॥ 35 ॥

संकट कटै मिटै सब पीरा । जो सुमिरै हनुमत बलबीरा ॥ 36 ॥

जै जै जै हनुमान गोसाईं । कृपा करहु गुरुदेव की नाईं ॥ 37 ॥

जो सत बार पाठ कर कोई । छूटहि बंदि महा सुख होई ॥ 38 ॥

जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा । होय सिद्धि साखी गौरीसा ॥ 39 ॥

तुलसीदास सदा हरि चेरा । कीजै नाथ हृदय महँ डेरा ॥ 40 ॥

दोहा

पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप । राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप ॥

  • या बजरंग बाण / हनुमान अष्टक
    बाल समय रवि भक्षी लियो तब तीनहुं लोक भयो अंधियारों I
    ताहि सों त्रास भयो जग को यह संकट काहु सों जात न टारो I

 

  • देवन आनि करी बिनती तब छाड़ी दियो रवि कष्ट निवारो I
    को नहीं जानत है जग में कपि संकटमोचन नाम तिहारो I
  • बालि की त्रास कपीस बसैं गिरि जात महाप्रभु पंथ निहारो I
    चौंकि महामुनि साप दियो तब चाहिए कौन बिचार बिचारो I
  • कै द्विज रूप लिवाय महाप्रभु सो तुम दास के सोक निवारो I
    को नहीं जानत है जग में कपि संकटमोचन नाम तिहारो I।
  • अंगद के संग लेन गए सिय खोज कपीस यह बैन उचारो I
    जीवत ना बचिहौ हम सो जु बिना सुधि लाये इहाँ पगु धारो I
  • हेरी थके तट सिन्धु सबै तब लाए सिया सुधि प्राण उबारो I
    को नहीं जानत है जग में कपि संकटमोचन नाम तिहारो I।
  • रावण त्रास दई सिय को सब राक्षसी सों कही सोक निवारो I
    ताहि समय हनुमान महाप्रभु जाए महा रजनीचर मारो I

 

  • चाहत सीय असोक सों आगि सु दै प्रभुमुद्रिका सोक निवारो I
    को नहीं जानत है जग में कपि संकटमोचन नाम तिहारो I।
  • बान लग्यो उर लछिमन के तब प्राण तजे सुत रावन मारो I
    लै गृह बैद्य सुषेन समेत तबै गिरि द्रोण सु बीर उपारो I
  • आनि सजीवन हाथ दिए तब लछिमन के तुम प्रान उबारो I
    को नहीं जानत है जग में कपि संकटमोचन नाम तिहारो I।
  • रावन जुद्ध अजान कियो तब नाग कि फाँस सबै सिर डारो I
    श्रीरघुनाथ समेत सबै दल मोह भयो यह संकट भारो I
  • आनि खगेस तबै हनुमान जु बंधन काटि सुत्रास निवारो I
    को नहीं जानत है जग में कपि संकटमोचन नाम तिहारो I।
  • बंधु समेत जबै अहिरावन लै रघुनाथ पताल सिधारो I
    देबिहिं पूजि भलि विधि सों बलि देउ सबै मिलि मन्त्र विचारो I
  • जाये सहाए भयो तब ही अहिरावन सैन्य समेत संहारो I
    को नहीं जानत है जग में कपि संकटमोचन नाम तिहारो I।
  • काज किये बड़ देवन के तुम बीर महाप्रभु देखि बिचारो I
    कौन सो संकट मोर गरीब को जो तुमसे नहिं जात है टारो I
  • बेगि हरो हनुमान महाप्रभु जो कछु संकट होए हमारो I
    को नहीं जानत है जग में कपि संकटमोचन नाम तिहारो I।

  दोहा

  • लाल देह लाली लसे , अरु धरि लाल लंगूर I
    वज्र देह दानव दलन , जय जय जय कपि सूर II

॥ बजरंग बाण ॥

निश्चय प्रेम प्रतीति ते, विनय करैं सनमान |
तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करैं हनुमान ||

जय हनुमान सन्त हितकारी। सुनि लीजै प्रभु अरज हमारी |
जन के काज विलम्ब न कीजै। आतुर दौरि महा सुख दीजै ||

जैसे कूदि सिन्धु वहि पारा। सुरसा बदन पैठि विस्तारा |
आगे जाय लंकिनी रोका। मारेहु लात गई सुर लोका ||

जाय विभीषण को सुख दीन्हा। सीता निरखि परम पद लीन्हा |
बाग उजारि सिन्धु मंह बोरा। अति आतुर यम कातर तोरा ||

अक्षय कुमार को मारि संहारा। लूम लपेटि लंक को जारा |
लाह समान लंक जरि गई। जै जै जै धुनि सुर पुर में भई ||

अब विलंब केहि कारण स्वामी। कृपा करहु उरु अन्तर्यामी |
जय जय लक्ष्मण प्राण के दाता। आतुर होई दुख करहु निपाता ||

जै गिरधर जै जै सुख सागर। सुर समूह समरथ भट नागर |
ॐ हनु-हनु-हनु हनुमंत हठीले। वैरहिं मारू बज्र की कीलै।|

गदा बज्र तै बैरिहीं मारौ। महाराज प्रभु दास उबारों |
ओंकार हुंकार महावे। बज्र गदा सदा विलम्ब न लावो ||

ॐ ह्रीं ह्रीं ह्रीं हनुमंत कपीसा। ॐ हुँ हुँ हुँ हनु अरि उर शीसा |
सत्य होहु हरि शपथ पाय कै। राम दुत धरू मारू जाई कै ||

जै जै जै हनुमन्त अनन्त अगाधा। दुःख पावत जन केहि अपराधा |
पूजा जप तप नेम अचारा। नहिं जानत है दास तुम्हारा ||

वन उपवन मग गिरी गृह माहीं। तुम्हरे बल हम डरपत नाहीं |
पांय परौं कर जोरि मनावौं, येहि अवसर अब केहि गोहरावौं ||

जय अंजनि कुमार बलवन्ता, शंकर सुवन वीर हनुमन्ता |
बदन कराल काल कुल घालक, राम सहाय सदा प्रतिपालक ||

भूत, प्रेत, पिशाच निशाचर, अग्नि बेताल काल मारी मर |
इन्हें मारु, तोहि शपथ राम की, राखउ नाथ मरजाद नाम की ||

जनकसुता हरि दास कहावो, ताकी शपथ विलम्ब न लावो |
जै जै जै धुनि होत अकासा, सुमिरत होत दुसह दु:ख नाशा ||

चरन शरण कर जोरि मनावौं, यहि अवसर अब केहि गोहरावौं |
उठु उठु चलु तोहि राम दुहाई, पांय परौं कर जोरि मनाई ||

ॐ चं चं चं चं चपल चलंता, ॐ हनु हनु हनु हनु हनुमंता |
हं हं हांक देत कपि चंचल, सं सं सहमि पराने खल दल ||

अपने जन को तुरत उबारो, सुमिरत होय आनंद हमारो |
यह बजरंग बाण जेहि मारै, ताहि कहो फिर कौन उबारै ||

पाठ करै बजरंग बाण की, हनुमत रक्षा करै प्राण की |
यह बजरंग बाण जो जापै, ताते भूत-प्रेत सब कांपै ||
धूप देय अरु जपै हमेशा, ताके तन नहिं रहै कलेशा ||

प्रेम प्रतीतिहिं कपि भजै। सदा धरैं उर ध्यान |
तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करैं हनुमान ||

अंत में मंत्र जप:

“ॐ नमो भगवते हनुमते नमः” (108 बार)

श्री राम स्तुति (Shri Ram Stuti)

श्री रामचन्द्र कृपालु भजुमन, हरण भवभय दारुणं ।

नव कंज लोचन कंज मुख, कर कंज पद कंजारुणं ॥१॥

कन्दर्प अगणित अमित छवि, नव नील नीरद सुन्दरं ।

पटपीत मानहुँ तडित रुचि शुचि , नोमि जनक सुतावरं ॥२॥

भजु दीनबन्धु दिनेश दानव, दैत्य वंश निकन्दनं ।

रघुनन्द आनन्द कन्द कोशल, चन्द दशरथ नन्दनं ॥३॥

शिर मुकुट कुंडल तिलक, चारु उदारु अङ्ग विभूषणं ।

आजानु भुज शर चाप धर, संग्राम जित खरदूषणं ॥४॥

इति वदति तुलसीदास शंकर, शेष मुनि मन रंजनं ।

मम् हृदय कंज निवास कुरु, कामादि खलदल गंजनं ॥५॥

मन जाहि राच्यो मिलहि सो, वर सहज सुन्दर सांवरो ।

करुणा निधान सुजान शील, स्नेह जानत रावरो ॥६॥

एहि भांति गौरी असीस सुन सिय, सहित हिय हरषित अली।

तुलसी भवानिहि पूजी पुनि-पुनि, मुदित मन मन्दिर चली ॥७॥

॥सोरठा॥

जानी गौरी अनुकूल सिय, हिय हरषु न जाइ कहि ।

मंजुल मंगल मूल वाम,  अङ्ग फरकन लगे।

॥ श्री हनुमंत स्तुति ॥

 मनोजवं मारुत तुल्यवेगं,जितेन्द्रियं, बुद्धिमतां वरिष्ठम् ॥ 

वातात्मजं वानरयुथ मुख्यं, श्रीरामदुतं शरणम प्रपद्धे ॥

॥ आरती ॥

आरती कीजै हनुमान लला की । दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ॥

जाके बल से गिरवर काँपे । रोग-दोष जाके निकट न झाँके ॥

अंजनि पुत्र महा बलदाई । संतन के प्रभु सदा सहाई ॥

दे वीरा रघुनाथ पठाए । लंका जारि सिया सुधि लाये ॥

लंका सो कोट समुद्र सी खाई । जात पवनसुत बार न लाई ॥

लंका जारि असुर संहारे । सियाराम जी के काज सँवारे ॥

लक्ष्मण मुर्छित पड़े सकारे । लाये संजिवन प्राण उबारे ॥

पैठि पताल तोरि जमकारे । अहिरावण की भुजा उखारे ॥

बाईं भुजा असुर दल मारे । दाहिने भुजा संतजन तारे ॥

सुर-नर-मुनि जन आरती उतरें । जय जय जय हनुमान उचारें ॥

कंचन थार कपूर लौ छाई । आरती करत अंजना माई ॥

जो हनुमानजी की आरती गावे । बसहिं बैकुंठ परम पद पावे ॥

लंक विध्वंस किये रघुराई । तुलसीदास स्वामी कीर्ति गाई ॥

आरती कीजै हनुमान लला की । दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ॥

॥ इति संपूर्णंम् ॥

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q-1: क्या महिलाएँ हनुमान पूजा कर सकती हैं?

हाँ, शास्त्रों में कोई प्रतिबंध नहीं।

Q-2: क्या रोज़ हनुमान चालीसा पढ़ना चाहिए?

हाँ, नियमितता सर्वोत्तम है।

Q-3: क्या बिना मूर्ति के पूजा संभव है?

हाँ, ध्यान और जप पर्याप्त है।

Q-4: कितने समय में फल मिलता है?

नियमितता और श्रद्धा पर निर्भर करता है।

Q-5: क्या हनुमान पूजा से भय दूर होता है?

लोकमान्यता और अनुभव दोनों इसे समर्थन देते हैं।

Q-6:हनुमान पूजा विधि कब करनी चाहिए?

हनुमान पूजा विधि सामान्य रूप से किसी भी दिन की जा सकती है, लेकिन मंगलवार और शनिवार को विशेष रूप से शुभ माना जाता है। यदि आप नियमित साधना करना चाहते हैं तो एक निश्चित दिन और समय तय करना बेहतर रहता है।

Q-7: क्या महिलाएँ हनुमान पूजा कर सकती हैं?

हाँ, महिलाएँ पूरी श्रद्धा से हनुमान पूजा कर सकती हैं। शास्त्रों में ऐसा कोई स्पष्ट निषेध नहीं है। मुख्य बात मन की पवित्रता और श्रद्धा है।

Q-8: घर पर हनुमान पूजा विधि कैसे शुरू करें?

सबसे पहले स्नान करें, साफ वस्त्र पहनें और पूजा स्थान को स्वच्छ करें। दीप जलाकर “ॐ हनुमते नमः” मंत्र से पूजा प्रारंभ करें, फिर हनुमान चालीसा का पाठ करें।

Q-9: हनुमान पूजा में कौन सा मंत्र सबसे प्रभावशाली है?

“ॐ हनुमते नमः” और “ॐ नमो भगवते हनुमते नमः” दोनों ही प्रचलित और प्रभावशाली मंत्र माने जाते हैं। इन्हें 11, 21 या 108 बार जपा जा सकता है।

Q-10: क्या रोज हनुमान चालीसा पढ़ना चाहिए?

हाँ, रोज हनुमान चालीसा पढ़ना लाभकारी माना जाता है। नियमित पाठ से मन शांत होता है और आत्मविश्वास बढ़ता है।

Q-11: हनुमान पूजा में सिंदूर क्यों चढ़ाया जाता है?

लोकमान्यता है कि हनुमान जी को सिंदूर अत्यंत प्रिय है। सिंदूर वीरता और शक्ति का प्रतीक माना जाता है, इसलिए पूजा में इसे अर्पित किया जाता है।

Q-12: क्या बिना मूर्ति के हनुमान पूजा विधि कर सकते हैं?

हाँ, यदि मूर्ति या चित्र उपलब्ध न हो तो ध्यानपूर्वक मंत्र जप और चालीसा पाठ से भी पूजा की जा सकती है। भावना अधिक महत्वपूर्ण है।

Q-13: हनुमान पूजा में क्या भोग लगाना चाहिए?

गुड़-चना, बूंदी लड्डू या बेसन के लड्डू सामान्यतः चढ़ाए जाते हैं। सात्विक और शुद्ध भोग अर्पित करना चाहिए।

Q-14: क्या हनुमान पूजा से शनि दोष दूर होता है?

लोकविश्वास के अनुसार शनिवार को हनुमान पूजा करने से शनि कष्ट कम होते हैं। कई लोग शनि शांति के लिए भी बजरंगबली की उपासना करते हैं।

Q-15: बजरंग बाण कब पढ़ना चाहिए?

बजरंग बाण विशेष परिस्थितियों जैसे गहरा भय, बाधा या संकट में पढ़ा जाता है। इसे श्रद्धा और संयम से पढ़ना चाहिए।

Q-16: हनुमान पूजा विधि में कितना समय लगता है?

साधारण पूजा में 20–30 मिनट लगते हैं। यदि चालीसा और अन्य स्तोत्र जोड़े जाएँ तो समय 45–60 मिनट तक हो सकता है।

Q-17: क्या हनुमान पूजा के दिन उपवास रखना जरूरी है?

उपवास अनिवार्य नहीं है, लेकिन कई भक्त मंगलवार या शनिवार को व्रत रखते हैं। यदि स्वास्थ्य अनुमति दे तो फलाहार कर सकते हैं।

Q-18: क्या पूजा के दौरान विशेष नियमों का पालन करना चाहिए?

हाँ, क्रोध, नकारात्मक विचार और तामसिक भोजन से बचना चाहिए। संयम और सात्विकता बनाए रखना आवश्यक है।

Q-19: हनुमान जयंती पर हनुमान पूजा विधि कैसे अलग होती है?

इस दिन विशेष चोला चढ़ाया जाता है, सुंदरकांड का पाठ किया जाता है और कई स्थानों पर भंडारा आयोजित होता है। यह दिन अत्यंत शुभ माना जाता है।

Q-20: हनुमान पूजा का वास्तविक लाभ क्या है?

हनुमान पूजा विधि से मानसिक साहस, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। नियमित साधना से व्यक्ति भीतर से अधिक स्थिर और मजबूत महसूस करता है।

अंतिम संदेश

हनुमान पूजा विधि का सार भव्यता में नहीं, भावना में है।
नियमितता, संयम और सच्ची श्रद्धा इसे प्रभावशाली बनाती है।

जब आप पूरी निष्ठा से “ॐ हनुमते नमः” का जप करते हैं, तो धीरे-धीरे मन स्थिर होता है।
और यहीं से वास्तविक शक्ति शुरू होती है।

जय श्री राम। जय हनुमान।

Posted by Satya Panditji

Satya Pandit is an experienced priest and spiritual guide who leads soul-enriching tours to sacred destinations. As a dedicated spiritual blogger, he shares profound insights on devotion, religion, and ancient traditions. His mission is to connect people with the core principles of spirituality and inspire them on their inner journeys.

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